Jan 6, 2019

श्री नृसिंह सरस्वती अष्टकं


॥ श्रीगणेशाय नम: ॥ ॐ द्रां दत्तात्रेयाय नमः ॥

इंदुकोटितेज करुणासिंधु भक्तवत्सलं। 

नंदनात्रिसूनु दत्त, इंदिराक्ष श्रीगुरुम् । 

गंधमाल्याक्षतादि-वृंददेववंदितम् । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम ॥ १ ॥ 

मायपाश-अंधकारछायदूरभास्करं । 

आयताक्ष पाहि श्रियावल्लभेश-नायकम् । 

सेव्य भक्तवृंद वरद, भूय भूय नमाम्यहं । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ २ ॥ 

चित्तजादिवर्गषट्क-मत्तवारणांकुशम् । 

तत्त्वसारशोभितात्मदत्त श्रियावल्लभम् । 

उत्तमावतार भूत-कर्तृ भक्तवतसलं । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ ३ ॥ 

व्योमरापवायुतेज-भूमिकर्तुमीश्वरम् । 

कामक्रोधमोहरहित सोमसूर्यलोचनम् । 

कामितार्थदातृ भक्त-कामधेनु श्रीगुरुम् । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ ४ ॥ 

पुंडरिक-आयताक्ष, कुंडलेंदुतेजसम् । 

चंडदुरितखंडनार्थ दंडधारि श्रीगुरुम् । 

मंडलीकमौलि मार्तंडभासिताननम् । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ ५ ॥ 

वेदशास्त्रस्तुत्यपाद, आदिमूर्ति श्रीगुरुम् । 

नादबिंदुकलातीत, कल्पपादसेव्ययम् । 

सेव्यभक्तवृंदवरद भूय भूय नमाम्यहम् । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ ६ ॥ 

अष्टयोगतत्त्वनिष्ठ, तुष्ट ज्ञानवारिधिम् । 

कृष्णावेणितीरवास-पंचनदीसंगमम् । 

कष्टदैन्यदूरिभक्त-तुष्टकाम्यदायकम् । 

वंदयामि नारसिंह-सरस्वतीश पाहि माम् ॥ ७ ॥ 

नारसिंहसरस्वती-नाम अष्टमौक्तिकम् । 

हारकृत शारदेन गंगाधर-आत्मजम् । 

धारणीक-देवदीक्ष गुरुमूर्तितोषितम् । 

परमात्मानंदश्रियापुत्रपौत्रदायकम् ॥ ८ ॥ 

नारसिंहसरस्वतीय अष्टकं च यः पठेत् । 

घोरसंसारसिंधुतारणाख्यसाधनम् । 

सारज्ञानदीर्घआयुरोग्यादिसंपदम् । 

चारुवर्गकाम्यलाभ वारंवार यज्जपेत् ॥९ ॥


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